
होली आते ही बाजार रंगों से भर जाता है, लेकिन इन रंगों के पीछे एक पूरा बिज़नेस इकोसिस्टम छिपा होता है. पिछले कुछ सालों में केमिकल रंगों से एलर्जी और स्किन प्रॉब्लम की खबरों के बाद लोग तेजी से ऑर्गेनिक गुलाल की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं. यही वजह है कि छोटे शहरों से लेकर बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक, आर्गेनिक रंगों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. सही प्लानिंग के साथ यह एक ऐसा स्टार्टअप बन सकता है जिसमें कम लागत और सीजनल हाई प्रॉफिट दोनों मिलते हैं.
ऑर्गेनिक रंगों का बिज़नेस क्यों बन रहा है बड़ा मौका
त्योहारों का बाजार हमेशा बड़ा होता है और होली इसका सबसे रंगीन उदाहरण है. आज के ग्राहक सिर्फ सस्ता रंग नहीं बल्कि स्किन-फ्रेंडली, केमिकल-फ्री, इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट ढूंढते हैं. इसी ट्रेंड की वजह से ऑर्गेनिक गुलाल का बाजार हर साल तेजी से बढ़ रहा है.
कितनी लागत में शुरू हो सकता है यह स्टार्टअप
छोटे स्तर पर ऑर्गेनिक रंगों का बिज़नेस 50 हजार से 2 लाख रुपये में शुरू किया जा सकता है.
मुख्य खर्च इन चीजों में आता है
• कच्चा माल
• ग्राइंडिंग और मिक्सिंग मशीन
• पैकेजिंग
• ब्रांडिंग
अगर शुरुआत घर से की जाए तो लागत और भी कम हो सकती है.
कच्चा माल कहां से आएगा
ऑर्गेनिक रंग बनाने के लिए आमतौर पर प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे हल्दी से पीला रंग, चुकंदर से गुलाबी, मेहंदी से हरा और पलाश के फूल से केसरिया। इन प्राकृतिक स्रोतों से तैयार रंग स्किन-फ्रेंडली होते हैं और बाजार में प्रीमियम कीमत पर बिकते हैं.
मार्केटिंग कैसे करें ताकि बिक्री बढ़े
इस बिज़नेस में असली गेम मार्केटिंग का होता है.

कुछ असरदार तरीके:
• सोशल मीडिया प्रमोशन
• लोकल दुकानों से टाई-अप
• स्कूल और सोसाइटी में बल्क सप्लाई
• ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग
अगर पैकेजिंग आकर्षक हो और “Eco Friendly Holi” का मैसेज साफ दिखे तो ग्राहक जल्दी आकर्षित होते हैं.
कितना हो सकता है मुनाफा
ऑर्गेनिक गुलाल का बिज़नेस मार्जिन के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है. उदाहरण के तौर पर एक किलो ऑर्गेनिक गुलाल बनाने की लागत लगभग 70 से 100 रुपये पड़ती है. वहीं बाजार में यह 250 से 400 रुपये प्रति किलो तक बिक सकता है. यानी सही मार्केटिंग के साथ इस बिज़नेस में 30% से 60% तक का प्रॉफिट मार्जिन संभव है.
इस बिज़नेस में सफल होने के लिए जरूरी टिप्स
अगर इस स्टार्टअप को बड़ा बनाना है तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है
• आकर्षक ब्रांड नाम
• इको-फ्रेंडली पैकेजिंग
• ऑनलाइन सेलिंग
• होली से 2–3 महीने पहले प्रोडक्शन
जो लोग समय से तैयारी करते हैं वही त्योहार के बाजार में ज्यादा फायदा उठाते हैं. तब देर किस बात की अगली होली से पहले आप भी बन जाइये कारोबारी।
